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Thursday, 27 April 2017

शीशे का बना हुआ अब मेरा मकान नहीं है..





सूरज को बड़प्पन का अभी ज्ञान नहीं है, 
दीये को ऊँचे कद की कुछ पहचान नहीं है..

जितनी उचाई पर देख रहा है आज वो खुद को, 
उतनी ऊँची उस परिंदे की उड़ान नहीं है..

वो बड़ा ही क्या जो किसी के काम ना आए, 
खजूर बड़ा है फिर भी उसकी शान नहीं है.. 

वक़्त आने पर अपनी इच्छाओ की भी आहुति दे दे,
इससे बढ़कर इस दुनिया में कोई बलिदान नहीं है..  

छलक छलक जाती है आधी भरी हुई गागर, 
भरे हुए मटके को खुद पर अभिमान नहीं है.. 

डाल रखा है चेहरे पर मासूमियत का नक़ाब, 
दिखता नादान है वो, पर इतना भी नादान नहीं है.. 

एक न एक दिन कहीं ढ़ूँढ़ ही लेंगे तुझे ए मंज़िल,
 खा भी ना सके ये ठोकरें, हम वो इंसान नहीं हैं..

अपनी इस दुनिया में ही अटका रहता है मेरा मन, 
इंसान हूँ भाई, किसी तोते में मेरी जान नहीं है..

सूना है, अंधेरो में भी डरता है वो अपने घर जाने में,
उस ज़िल्लत के साथ जीने वाला कोई महान नहीं है.. 

अमृत त्याग कर विष धारण करना होता है यहां,
इस ज़माने में शिव बनना उतना आसान नहीं है.. 

क़ुबूल करता है आजकल पत्थर के तोहफे भी सुमीत, 
शीशे का बना हुआ अब मेरा मकान नहीं है.. 



18 comments:

  1. शब्दों का खूबसूरत प्रयोग। बधाई

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  2. काश अपना भी कोई होता जो,
    प्यार भरा ख़त लिख देता,
    फूलों की सौगात नहीं,
    बस दो आंसू ही देता,
    कोई नहीं अपना यहाँ,
    सारा आलम तन्हा है
    कैसे गुजरेगा ये वक्त काश वो हमें बता देता
    सिर्फ तुम.....devisha.sharma05@gmail.com

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    Replies
    1. Jid to nahi tha magar,kash bat to hota,mere jajbato ko wo nahi samjhti, lekin mere chehre par muskan to hota

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  3. क्या कमाल के शब्द सजाये है आप ने.....

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  4. This comment has been removed by the author.

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  5. अमृत त्याग कर विष धारण करना होता है यहां, इस ज़माने में शिव बनना उतना आसान नहीं है. वाह, लाजवाब पोस्ट। अमृत ही विष पी सकता है क्यूंकि वो अमृत है

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  6. अद्भुत दर्शनशास्त्र और सुंदर रचना । इसके लिए आपको बधाई । आभार

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  7. Beautifully penned.
    keep writing continually. god bless

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  8. बबुत खूब ... हर शेर लाजवाब ही ... दिलचस्प है ...

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  9. Dil ke jajbato ko yun likh dena yun aasan nahi hota, jo urta hai hamesa aakash me woske pass koi par nahi hota. NIRALA

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  10. Kya kamaal likha hai. Main to abhibhut hun padhkar. Ummid hai age bhi shabdon ka rasaswadan karate rahenge.

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